शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
शिव मंत्र
ॐ अग्निजन्मने नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपअग्नि-संभव
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
अग्नि से उत्पन्न होने वाले देव को नमस्कार।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
जठराग्नि व शारीरिक तेज की प्रखरता
विस्तृत लाभ
जठराग्नि व शारीरिक तेज की प्रखरता।
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ॐ भव्याय नमः
ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं ऐं सौं ॐ ह्रीं क ए ई ल ह्रीं ह स क ह ल ह्रीं सकल ह्रीं सौं ऐं क्लीं ह्रीं श्रीं ॐ।
ॐ अनङ्गदर्पनाशिन्यै नमः
ॐ सर्वे वै देवा देवीमुपतस्थुः कासि त्वं महादेवीति। साब्रवीत्- अहं ब्रह्मस्वरूपिणी। मत्तः प्रकृतिपुरुषात्मकं जगत्। शून्यं चाशून्यं च॥
ॐ श्रीं महादेव्यै सरस्वत्यै स्वाहा
ॐ कोमलाङ्ग्यै नमः