ज्येष्ठा लक्ष्मी मंत्र
ॐ ऐं ह्रीं श्रीं ज्येष्ठ लक्ष्मी स्वयम्भुवे ह्रीं ज्येष्ठायै नमः।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
ऐं, ह्रीं, श्रीं बीज शक्तियों से युक्त, स्वयंभू ज्येष्ठा लक्ष्मी को मेरा नमन है।
इस मंत्र से क्या होगा?
संपत्ति का संरक्षण और नेतृत्व की प्राप्ति
विस्तृत लाभ
संपत्ति का संरक्षण और नेतृत्व की प्राप्ति।
जप काल
स्थिर लग्न में जप 25।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ क्रौं कल्किदेवाय नमः
पाँचों त्रिशेम चलें, लांगुरिया सलार चलें। भीम की गदा चले, हनुमान की हाँक चले। नाहर की धाक चलै, नहीं चलै, तो हजरत सुलेमान के तखत की दुहाई है। एक लाख अस्सी हजार पीर व पैगम्बरों की दुहाई है। चलो मन्त्र, ईश्वर वाचा। गुरु का शब्द साँचा।
ॐ ऐं ह्रीं श्रीं वाग्देव्यै सरस्वत्यै नमः
ॐ संसारभयतः पातु मृत्योर्मृत्युर्-नृकेसरी
अनेकमन्त्रनादमञ्जुनूपुरारवस्खलत्समाजराजहंसवंशणिक्वाणातिगौरवे। विलोलहेमवल्लरीविडम्बिवारुचङ्क्रमे कदा करिष्यसीह मां कृपाकटाक्षभाजनम्॥
यः पुस्तकाक्षगुण दण्डकमण्डलु श्रीर्निर्वृत्यमान करभूषणमिन्दुवर्णम् । स्तम्बेरमानन चतुष्टय शोभमानं त्वां संस्मरे द्विजगणाधिपते धन्यः ॥