शिव मंत्र
अनङ्गरङ्गमङ्गलप्रसङ्गभङ्गुरभ्रुवां सविभ्रमससम्भ्रमदृगन्तबाणपातनैः। निरन्तरं वशीकृतप्रतीतनन्दनन्दने कदा करिष्यसीह मां कृपाकटाक्षभाजनम्॥
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
अपने नेत्र रूपी बाणों से नन्दनन्दन (श्रीकृष्ण) को निरंतर वश में करने वाली हे राधे, मेरी ओर कृपादृष्टि कब डालेंगी?
इस मंत्र से क्या होगा?
लाभ: कृष्ण-आकर्षण
विस्तृत लाभ
लाभ: कृष्ण-आकर्षण।
टिप्पणी
यहाँ इस सिद्ध स्तोत्र के सभी 19 श्लोकों को मंत्र रूप में, उनके अर्थ और लाभ सहित प्रस्तुत किया गया है। सभी का
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
देवीं सरस्वतीं सरस्वतीं देवीं देवीं सरस्वतीं वाजेभिर्वाजेभिस्सरस्वतीं देवीं देवीं सरस्वतीं वाजेभिः॥ सरस्वतीं वाजेभिर्वाजेभिस्सरस्वतीं सरस्वतीं वाजेभिर्वाजिनीवतीं वाजिनीवतीं वाजेभिस्सरस्वतीं सरस्वतीं वाजेभिर्वाजिनीवतीं॥ वाजेभिर्वाजिनीवतीं वाजिनीवतीं वाजेभिर्वाजेभिर्वाजिनीवतीं। वाजिनीवतीति वाजिनी-वती॥
ॐ कामिने नमः।
ॐ भक्तवत्सलाय नमः
श्री राम जय राम सुंदर राम (Sri Ram Jaya Ram Sundara Ram)
ॐ त्रिपुरान्तक्यै नमः
ॐ सर्वाद्भुताय नमः