शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
नीलग्रीव स्तुति मंत्र
असौ योऽवसर्पति नीलग्रीवो विलोहितः। उतैनं गोपा अदृशन्नदृशन्नुदहार्यः। उतैनं विश्वा भूतानि स दृष्टो मृडयाति नः॥
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
जप काउंटर लोड हो रहा है...
प्रकारदर्शन व कृपा मंत्र
स्वरूपनीलग्रीव (नीले कंठ वाले सूर्य स्वरूप शिव)
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जो नीले कंठ वाले और लाल वर्ण वाले रुद्र (सूर्य रूप में) उदित हो रहे हैं, उन्हें ग्वाले और पनिहारिनें भी देखती हैं। वे सभी जीवों द्वारा देखे जाते हैं, वे हम पर कृपा करें 41।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
अज्ञान का अंधकार दूर होना, और भगवान की प्रत्यक्ष कृपा दृष्टि प्राप्त होना
विस्तृत लाभ
अज्ञान का अंधकार दूर होना, और भगवान की प्रत्यक्ष कृपा दृष्टि प्राप्त होना 37।
जप काल
प्रातःकाल सूर्य दर्शन के समय।
इसे भी पढ़ें
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र