ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
शास्त्रीय पौराणिक मंत्र

कुमार सूक्त मंत्र 1

अस्य घा वीर ईवतोऽग्नेरीशीत मर्त्यः । तिग्मजम्भस्य मीळ्हुषः ॥

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

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प्रकारवैदिक स्तुति
स्वरूपअग्नि-कुमार
अर्थ एवं भावार्थ

इस मंत्र का अर्थ

जो उपासक यज्ञ में प्रयत्नशील है, वह तीक्ष्ण रश्मियों वाले इस अग्नि (कुमार) की कृपा प्राप्त करे।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

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आध्यात्मिक शक्ति और अभीष्ट की प्राप्ति

विस्तृत लाभ

आध्यात्मिक शक्ति और अभीष्ट की प्राप्ति।

जप काल

यज्ञ के समय वैदिक सस्वर पाठ।

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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र

ॐ गणानां त्वा गणपतिं हवामहे कविं कवीनामुपमश्रवस्तमम् । ज्येष्ठराजं ब्रह्मणां ब्रह्मणस्पत आ नः शृण्वन्नूतिभिः सीद सादनम् ॥

परशुं दक्षिणे हस्ते वामे च दधतं धनुः। रम्यं भृगुकुलोत्तंसं घनश्यामं मनोहरम्॥

ॐ क्लीं कृष्णाय गोविन्दाय गोपीजनवल्लभाय पराय परमपुरुषाय परमात्मने परकर्म-मन्त्र-यन्त्र-तन्त्र-औषधास्त्र-शस्त्राणि संहर संहर मृत्योर्मोचय मोचय...

चन्द्रहासोज्ज्वलकरा शार्दूलवरवाहना। कात्यायनी शुभं दद्याद्देवी दानवघातिनी॥

चन्द्रां प्रभासां यशसा ज्वलन्तीं श्रियं लोके देवजुष्टामुदाराम्। तां पद्मिनीमीं शरणमहं प्रपद्येऽलक्ष्मीर्मे नश्यतां त्वां वृणे॥

ॐ कदम्बवनसञ्चारायै नमः