शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
शिव मंत्र
ॐ बालार्कसदृशाननाय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपसूर्य-मुखी
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
उदय होते हुए बाल-सूर्य के समान लाल और तेजस्वी मुख वाले को नमन।
जप काल
नित्य प्रातः काल, लाल आसन पर बैठकर रुद्राक्ष या लाल चंदन की माला से 108 नामों का क्रमशः उच्चारण करते हुए पुष्प अर्पित करें।
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ गिरिजायै नमः
ॐ पादतलं गोपी पातु।
ॐ श्रीधराय नमः
ॐ नमस्ते गणपतये ॥ त्वमेव प्रत्यक्षं तत्त्वमसि ॥ त्वमेव केवलं कर्ताऽसि ॥ त्वमेव केवलं धर्ताऽसि ॥ त्वमेव केवलं हर्ताऽसि ॥ त्वमेव सर्वं खल्विदं ब्रह्मासि ॥ त्वं साक्षादात्माऽसि नित्यम् ॥
ॐ ह्रीं विद्यास्वरूपायै स्वाहा मे पातु नाभिकाम्। (स्वरूप: विद्यास्वरूपा | लाभ: नाभि, मणिपूर चक्र और नाद के उद्गम स्थान 'पश्यन्ती' वाक् की रक्षा | अर्थ: विद्यास्वरूपा मेरी नाभि की रक्षा करें) 8
ॐ कोटिसूर्यसमप्रभाय नमः