शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
शिव मंत्र
ॐ भावाय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जो शुद्ध अस्तित्व स्वरूप हैं
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
आत्मज्ञान और सत्य की पहचान
विस्तृत लाभ
आत्मज्ञान और सत्य की पहचान 22
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ क्रीं क्रीं क्रीं हूँ हूँ ह्रीं ह्रीं दक्षिणे कालिके क्रीं क्रीं क्रीं हूँ हूँ ह्रीं ह्रीं स्वाहा॥
ॐ त्रिवर्णाय नमः
ॐ गद्यपद्यवासिन्यै स्वाहा मामुत्तरेऽवतु। (अर्थ: गद्य-पद्य में निवास करने वाली देवी उत्तर में रक्षा करें) 8
अश्मा च मे मृत्तिका च मे गिरयश्च मे पर्वताश्च मे...
ॐ दुर्गमज्ञानदायै नमः
सर्वं जगदिदं त्वत्तो जायते ॥ सर्वं जगदिदं त्वत्तस्तिष्ठति ॥ सर्वं जगदिदं त्वयि लयमेष्यति ॥ सर्वं जगदिदं त्वयि प्रत्येति ॥ त्वं भूमिरापोऽनलोऽनिलो नभः ॥ त्वं चत्वारि वाक्पदानि ॥