शिव मंत्र
ॐ धनुर्धराय नमः
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
जो अपने हाथों में शिवधनुष के समान विशाल कोदण्ड धारण करने वाले श्रेष्ठ धनुर्धर हैं।
इस मंत्र से क्या होगा?
इन 108 मंत्रों का शृंखलाबद्ध पाठ शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक शांति प्रदान करता है
दरिद्रता व नकारात्मकता का नाश करता है
और अंततः वैकुण्ठ की प्राप्ति सुनिश्चित करता है
विस्तृत लाभ
इन 108 मंत्रों का शृंखलाबद्ध पाठ शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक शांति प्रदान करता है; दरिद्रता व नकारात्मकता का नाश करता है; और अंततः वैकुण्ठ की प्राप्ति सुनिश्चित करता है।
जप काल
नित्य प्रातः या गोधूलि वेला में, तुलसी या रुद्राक्ष की माला से अनुष्ठानिक पाठ।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ विश्वयोनये नमः
जो महर्षि भृगु के पवित्र वंश को आनंदित करने वाले हैं, उन्हें नमस्कार। (लाभ: कुल-गोत्र की वृद्धि) 19।
ॐ सदाम्बिकायै स्वाहा वायव्ये मां सदाऽवतु। (अर्थ: सदाम्बिका देवी वायव्य कोण में रक्षा करें) 8
ॐ हरये नमः
ब्रह्मासि रुद्रस्त्वमिन्द्रस्त्वमग्निस्त्वं वायुस्त्वं सूर्यस्त्वं चन्द्रमास्त्वं ब्रह्मभूर्भुवःस्वरोम्॥
ॐ कुञ्जाधिराजमहिष्यै नमः