शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
शिव मंत्र
ॐ दुर्लभाय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपदुर्लभ स्वरूप
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जो पाखंडियों और अभक्तों के लिए अत्यंत दुर्लभ हैं, उन्हें नमस्कार है।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
दुर्लभ और अमूल्य ईश्वरीय कृपा की प्राप्ति जो साधारण मनुष्यों को सुलभ नहीं है
विस्तृत लाभ
दुर्लभ और अमूल्य ईश्वरीय कृपा की प्राप्ति जो साधारण मनुष्यों को सुलभ नहीं है।
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ॐ अमोघायै नमः
राधे कृष्ण राधे कृष्ण कृष्ण कृष्ण राधे राधे। राधे श्याम राधे श्याम श्याम श्याम राधे राधे॥
ॐ विमत्सराय नमः
इडा देवहूर्मनुर्यज्ञनीर्बृहस्पतिरुक्थामदानि शंसिषद् विश्वेदेवाः सूक्तवाचः पृथिविमातर्मा मा हिंसीर्मधु मनिष्ये मधु जनिष्ये मधु वक्ष्यामि मधु वदिष्यामि मधुमतीं देवेभ्यो वाचमुद्यासँशुश्रूषेण्यां मनुष्येभ्यस्तं मा देवा अवन्तु शोभायै पितरोऽनुमदन्तु॥
ॐ परमडम्भाय नमः
ॐ बर्हिबर्हावतंसकाय नमः