शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
एकदंत स्वरूप श्लोक
एकदन्तं महाकायं तप्तकाञ्चनसन्निभम् । लम्बोदरं विशालाक्षं वन्देऽहं गणनायकम् ॥
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारस्वरूप ध्यान श्लोक
स्वरूपलम्बोदर / गणनायक
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जिनका एक दांत है, विशाल शरीर है, जिनका वर्ण तपे हुए स्वर्ण के समान है, जिनका उदर बड़ा है और नेत्र विशाल हैं, ऐसे गणनायक को मैं नमन करता हूँ।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
जीवन में भौतिक स्थिरता और नेतृत्व क्षमता का विकास
विस्तृत लाभ
जीवन में भौतिक स्थिरता और नेतृत्व क्षमता का विकास।
जप काल
गणेश उत्सव के दौरान सामूहिक गान।
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