ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
शास्त्रीय पौराणिक मंत्र

शिव मंत्र

ॐ जयायै नमः।

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

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प्रकारपाञ्चरात्र अनुचर मंत्र (जया)
अर्थ एवं भावार्थ

इस मंत्र का अर्थ

जिनके एक मंद कटाक्ष (कृपा-दृष्टि) से ब्रह्मा, इन्द्र और शिव वैभव प्राप्त करते हैं, उन त्रैलोक्य को अपना कुटुंब मानने वाली, कमल पर विराजने वाली मुकुंद-प्रिया की मैं वंदना करता हूँ।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

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सभी भौतिक और आध्यात्मिक युद्धों में शाश्वत विजय

विस्तृत लाभ

सभी भौतिक और आध्यात्मिक युद्धों में शाश्वत विजय।

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ॐ स्वाहायै नमः

उरुदघ्ने नाभिदघ्ने हृद्दघ्ने कण्ठदघ्नके। राधाकुण्डजले स्थिता यः पठेत्साधकः शतम्॥

ॐ श्यामकन्धराय नमः

वायव्ये कपाल भैरवाय नमः वायव्ये मां रक्ष रक्ष काल कंटकान् भक्ष भक्ष आवाहयाम्यहं इत्र तिष्ठ तिष्ठ हुं फट् स्वाहा।

देवीं सरस्वतीं सरस्वतीं देवीं देवीं सरस्वतीं वाजेभिर्वाजेभिस्सरस्वतीं देवीं देवीं सरस्वतीं वाजेभिः॥ सरस्वतीं वाजेभिर्वाजेभिस्सरस्वतीं सरस्वतीं वाजेभिर्वाजिनीवतीं वाजिनीवतीं वाजेभिस्सरस्वतीं सरस्वतीं वाजेभिर्वाजिनीवतीं॥ वाजेभिर्वाजिनीवतीं वाजिनीवतीं वाजेभिर्वाजेभिर्वाजिनीवतीं। वाजिनीवतीति वाजिनी-वती॥

ॐ महाशक्तये नमः