शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
शिव मंत्र
ॐ कमण्डलुधराय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारनाम-मंत्र
स्वरूपकमंडलु धारी
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जो तपस्वी के रूप में पवित्र जल से युक्त कमंडलु धारण करते हैं।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
पवित्रता
विस्तृत लाभ
पवित्रता
जप काल
नित्य
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ सुधामूर्त्यै नमः
ऊर्ध्वे महाकाल भैरवाय नमः ऊर्ध्वे मां रक्ष रक्ष काल कंटकान् भक्ष भक्ष आवाहयाम्यहं इत्र तिष्ठ तिष्ठ हुं फट् स्वाहा।
ॐ भारत्यीप्रियाय नमः
ॐ दशग्रीवदर्पघ्नाय नमः
रोगानशेषानपहंसि तुष्टा रुष्टा तु कामान् सकलानभीष्टान्। त्वामाश्रितानां न विपन्नराणां त्वामाश्रिता ह्याश्रयतां प्रयान्ति॥
अश्वपूर्वां रथमध्यां हस्तिनादप्रबोधिनीम्। श्रियं देवीमुपह्वये श्रीर्मा देवीर्जुषताम्॥