शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
शिव मंत्र
ॐ काञ्चनाभाय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपस्वर्ण-आभा
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
स्वर्ण (सोने) के समान चमकती आभा और कांती वाले भगवान को नमन।
जप काल
नित्य प्रातः काल, लाल आसन पर बैठकर रुद्राक्ष या लाल चंदन की माला से 108 नामों का क्रमशः उच्चारण करते हुए पुष्प अर्पित करें।
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ शिरो मे विष्णुपत्नी च ललाटं अमृतोद्भवा। चक्षुषी सुविशालाक्षी श्रवणे सागरम्बुजा॥
ॐ षोडशस्त्रीसहस्रेशाय नमः
ॐ पूतात्मने नमः
बालग्रहाभिभूतानां बालानां शान्तिकारकम्। सङ्घातभेदे च नृणां मैत्रीकरणमुत्तमम्॥ 17
ॐ विष्णुवल्लभाय नमः
वीणां कल्पलतां अरिं च वरदं दक्षे विदत्ते करैः वामे तामरसं च रत्नकलशं सन्मञ्जरीं चाभयम् । शुण्डादण्ड लसन्मृगेन्द्रवदनः शङ्खेन्दुगौरः शुभो दीव्यद्रत्ननिभांशुकः गणपतिः पायादपायात्स नः ॥