शिव मंत्र
ॐ काञ्चनाद्रीकृतागारायै नमः
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
सुमेरु (स्वर्ण) पर्वत पर अपना भव्य निवास स्थान बनाने वाली देवी।
इस मंत्र से क्या होगा?
सुमेरु पर्वत जैसी अडिग स्थिरता और स्वर्ण (धन) की प्राप्ति
विस्तृत लाभ
सुमेरु पर्वत जैसी अडिग स्थिरता और स्वर्ण (धन) की प्राप्ति।
जप काल
नित्य उपासना, शिवरात्रि या अमावस्या की मध्यरात्रि में रुद्राक्ष या मुण्ड माला से जप।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ कृष्णसम्मोहिन्यै नमः
ॐ गोविन्दाय नमः
ॐ वासुदेवाय नमः
शं च मे मयश्च मे प्रियं च मेऽनुकामश्च मे...
वशीकृतमहादेवं दृप्तभूपकुलान्तकम्। तेजस्विनं कार्तवीर्यनाशनं भवनाशनम्॥
देवीं सरस्वतीं सरस्वतीं देवीं देवीं सरस्वतीं वाजेभिर्वाजेभिस्सरस्वतीं देवीं देवीं सरस्वतीं वाजेभिः॥ सरस्वतीं वाजेभिर्वाजेभिस्सरस्वतीं सरस्वतीं वाजेभिर्वाजिनीवतीं वाजिनीवतीं वाजेभिस्सरस्वतीं सरस्वतीं वाजेभिर्वाजिनीवतीं॥ वाजेभिर्वाजिनीवतीं वाजिनीवतीं वाजेभिर्वाजेभिर्वाजिनीवतीं। वाजिनीवतीति वाजिनी-वती॥