शिव मंत्र
ॐ काञ्चनाद्रीकृतागारायै नमः
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
सुमेरु (स्वर्ण) पर्वत पर अपना भव्य निवास स्थान बनाने वाली देवी।
इस मंत्र से क्या होगा?
सुमेरु पर्वत जैसी अडिग स्थिरता और स्वर्ण (धन) की प्राप्ति
विस्तृत लाभ
सुमेरु पर्वत जैसी अडिग स्थिरता और स्वर्ण (धन) की प्राप्ति।
जप काल
नित्य उपासना, शिवरात्रि या अमावस्या की मध्यरात्रि में रुद्राक्ष या मुण्ड माला से जप।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ आं ह्रीं क्रों सहस्रार हुं फट् स्वाहा
ॐ रमायै नमः
ॐ अनिरुद्धाय नमः
ॐ ह्रां ह्रीं ॐ नमो भगवते महा-वीर-वीराय सर्वदुःख निवारणाय ग्रहमण्डल सर्वभूतमण्डल सर्व-पिशाच-मण्डलोच्चाटन भूत-ज्वर एकाहिक-ज्वर द्वयाहिक-ज्वर त्र्याहिक-ज्वर चातुर्थिक-ज्वर संताप-ज्वर विषम-ज्वर ताप-ज्वर माहेश्वर-वैष्णव-ज्वरान् छिन्दि-छिन्दि यक्ष ब्रह्मराक्षस भूत-प्रेत-पिशाचान् उच्चाटय-उच्चाटय स्वाहा।
ॐ हंसायै नमः
ॐ गोपगोपीश्वराय नमः