शरणागति / क्षमा प्रार्थना मंत्र
करचरणकृतं वाक् कायजं कर्मजं वा श्रवणनयनजं वा मानसंवापराधं। विहितं विहितं वा सर्व मेतत् क्षमस्व जय जय करुणाब्धे श्री महादेव शम्भो॥
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
हाथ, पैर, वाणी, शरीर, कर्म, कान, आंख या मन से किए गए मेरे सभी अपराधों को, चाहे वे विहित हों या अविहित (शास्त्र-सम्मत या विरुद्ध), हे करुणा के सागर श्री महादेव शंभु! आप क्षमा करें। आपकी जय हो 25।
इस मंत्र से क्या होगा?
पूर्व और वर्तमान जन्म के ज्ञात-अज्ञात पापों का क्षय, आत्मग्लानि से मुक्ति और अंतःकरण की शुद्धि
विस्तृत लाभ
पूर्व और वर्तमान जन्म के ज्ञात-अज्ञात पापों का क्षय, आत्मग्लानि से मुक्ति और अंतःकरण की शुद्धि 25।
जप काल
रात्रि शयन से पूर्व या शिव पूजा के समापन पर दोनों हाथ जोड़कर।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ लम्बकर्णाय विद्महे वक्रतुण्डाय धीमहि । तन्नो दन्ती प्रचोदयात् ॥
ॐ ह्रीं विद्यास्वरूपायै स्वाहा मे पातु नाभिकाम्। (स्वरूप: विद्यास्वरूपा | लाभ: नाभि, मणिपूर चक्र और नाद के उद्गम स्थान 'पश्यन्ती' वाक् की रक्षा | अर्थ: विद्यास्वरूपा मेरी नाभि की रक्षा करें) 8
ॐ सत्यज्ञानायै नमः
ॐ कपालरूपमात्रगायै नमः
ॐ विभूत्यै नमः
ॐ श्रीं ह्रीं रां रामाय नमः