दक्षिणा काली द्वाविंशत्यक्षरी (22-अक्षरी) महामंत्र
ॐ क्रीं क्रीं क्रीं हूँ हूँ ह्रीं ह्रीं दक्षिणे कालिके क्रीं क्रीं क्रीं हूँ हूँ ह्रीं ह्रीं स्वाहा॥
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
'क्रीं' (काली बीज), 'हूँ' (कूर्च-रक्षा), 'ह्रीं' (माया-ज्ञान)। हे दक्षिणा काली! मेरे अज्ञान का नाश कर मुझे पूर्णता प्रदान करें (स्वाहा)।
इस मंत्र से क्या होगा?
अहंकार का नाश, मोक्ष और सर्वोच्च तांत्रिक सिद्धियां
विस्तृत लाभ
अहंकार का नाश, मोक्ष और सर्वोच्च तांत्रिक सिद्धियां।
जप काल
गुरु-दीक्षा अनिवार्य। श्मशान या एकांत स्थान पर।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ कृत्तिवाससे नमः
ॐ गीतामृतमहोदधये नमः
ॐ चतुर्दंष्ट्राय नमः
अनन्तकोटिविष्णुलोकनम्रपद्मजार्चिते हिमाद्रिजापुलोमजाविरिञ्चिजावरप्रदे। अपारसिद्धिरिद्धिदिग्दिगन्तकीर्तिदिगधमे कदा करिष्यसीह मां कृपाकटाक्षभाजनम्॥
ॐ सोमनन्दनाय नमः
ॐ मेधा देवी जुषमाणा न आगाद्विश्वाची भद्रा सुमनस्यमाना। त्वया जुष्टा नुदमाना दुरुक्तान बृहद्वदेम विदथे सुवीराः॥