शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
शिव मंत्र
ॐ क्षेत्राय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपक्षेत्र स्वरूप
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जो स्वयं कुरुक्षेत्र या धर्मक्षेत्र रूपी युद्धभूमि हैं, उन्हें नमस्कार है।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
जीवन के धर्मयुद्ध में साधक को सही मार्ग और उचित आधार प्रदान करना
विस्तृत लाभ
जीवन के धर्मयुद्ध में साधक को सही मार्ग और उचित आधार प्रदान करना।
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ॐ करदानपरायणायै नमः
वसुन्धरे श्री वसुधे वसुदोग्ध्रे कृपामयि! त्वत्कुक्षिगतं सर्वस्वं शीघ्रं मे त्वं प्रदर्शय॥
मृणालवालवल्लरी तरङ्गरङ्गदोर्लते लताग्रलास्यलोलनीललोचनावलोकने। ललल्लुलन्मलन्मनोज्ञमुग्धमोहनाश्रिते कदा करिष्यसीह मां कृपाकटाक्षभाजनम्॥
ॐ डिम्भाय नमः।
तप्तकाञ्चन संकाशश्चाष्टहस्तो महातनुः । दीप्ताङ्कुशं शरं चाक्षं दन्तं दक्षे वहन् करैः ॥ वामे पाशं कार्मुकं च लतां जम्बू दधत् करैः । रक्तांशुकः सदा भूयाद् दुर्गागणपतिर्मुदे ॥
ॐ अष्टमूर्तये नमः