शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
शिव मंत्र
ॐ लोकमात्रे नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
समस्त लोकों की माता (विश्वजननी) को नमन 57।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ कामपीठविलासिन्यै नमः
ॐ ह्रीं वाग्वादिन्यै स्वाहा नासां मे सर्वतोऽवतु। (स्वरूप: वाग्वादिनी | लाभ: प्राण-वायु और नासिका की रक्षा | अर्थ: वाग्वादिनी नासिका की सभी प्रकार से रक्षा करें) 8
पाँचों त्रिशेम चलें, लांगुरिया सलार चलें। भीम की गदा चले, हनुमान की हाँक चले। नाहर की धाक चलै, नहीं चलै, तो हजरत सुलेमान के तखत की दुहाई है। एक लाख अस्सी हजार पीर व पैगम्बरों की दुहाई है। चलो मन्त्र, ईश्वर वाचा। गुरु का शब्द साँचा।
ॐ भूधराधीशाय नमः।
ॐ अनेकात्मने नमः
ॐ दूषणत्रिशिरोहन्त्रे नमः