महर्षि-वंदित परशुराम
महेन्द्रे वै गिरिश्रेष्ठे रामं नित्यम् उपासते। ऋषयो वेदविदुषो गन्धर्वाप्सरसस्तथा॥
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
पर्वतों में श्रेष्ठ महेंद्र पर्वत पर, वेदों के ज्ञाता ऋषिगण, गंधर्व और अप्सराएँ नित्य भगवान परशुराम की उपासना करते हैं।
इस मंत्र से क्या होगा?
वेदों के ज्ञान में रुचि और सत्संग की प्राप्ति
विस्तृत लाभ
वेदों के ज्ञान में रुचि और सत्संग की प्राप्ति।
जप काल
प्रातःकालीन नित्य पूजा में।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
हस्तीन्द्राननमिन्दुचूडमरुणच्छायं त्रिनेत्रं रसात् आलिष्टं प्रियया सपद्मकरया स्वाङ्कस्थया सन्ततम् । बीजपूर गदेक्षु कार्मुकलसच्चक्राब्ज पाशोत्पल व्रीह्यग्रस्वविषाण रत्नकलशान् हस्तैर्वहन्तं भजे ॥
ॐ दुर्गमायै नमः
ॐ अक्षराय नमः
ॐ हिरण्यवर्णां हरिणीं सुवर्णरजतस्रजाम्। चन्द्रां हिरण्मयीं लक्ष्मीं जातवेदो म आवह॥
ॐ पापनाशिन्यै नमः
ॐ शङ्खोपमषड्गल्सुप्रभाय नमः