शिव मंत्र
मनसः काममाकूतिं वाचः सत्यमशीमहि। पशूनां रूपमन्नस्य मयि श्रीः श्रयतां यशः॥
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
मैं मन की कामनाओं और वाणी की सत्यता को प्राप्त करूँ। समृद्धि और यश मुझमें आश्रय लें।
इस मंत्र से क्या होगा?
मनोकामना पूर्ति, वाणी में सत्यता
विस्तृत लाभ
मनोकामना पूर्ति, वाणी में सत्यता।
जप काल
नया कार्य आरंभ करते समय।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ यो वै रामचन्द्रः स भगवान् ये परमपुरुषः तस्मै वै नमो नमः भूर्भुवः स्वः
ॐ सर्वोपास्याय नमः
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे। ॐ ग्लौं हुं क्लीं जूं सः ज्वालय ज्वालय ज्वल ज्वल प्रज्वल प्रज्वल ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ज्वल हं सं लं क्षं फट् स्वाहा॥
ॐ परमहंसाय विद्महे महाहंसाय धीमहि तन्नो हंसः प्रचोदयात्।
जो भक्तों के हृदय में रमण करने वाले भगवान राम (भार्गव राम) हैं, उन्हें नमस्कार। (लाभ: आंतरिक शांति) 19।
ॐ शृतं मे मा प्रहासीः अनेनाधीतेनाहोरात्रान्सन्दधामि ऋतं वदिष्यामि सत्यं वदिष्यामि। तन्मामवतु तद्वक्तारमवतु अवतु मामवतु वक्तारमवतु वक्तारम्। ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥