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शास्त्रीय पौराणिक मंत्र

मयि मेधां मयि प्रज्ञां

मयि मेधां मयि प्रजां मय्यग्निस्तेजो दधातु। मयि मेधां मयि प्रजां मयीन्द्र इन्द्रियं दधातु। मयि मेधां मयि प्रजां मयि सूर्यो भ्राजो दधातु॥

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

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प्रकारप्रार्थना मन्त्र / मेधा सूक्त
स्वरूपमेधा सरस्वती
अर्थ एवं भावार्थ

इस मंत्र का अर्थ

अग्नि देव मुझमें मेधा, प्रजा और तेज धारण करें। इंद्र देव मुझमें मेधा, प्रजा और इन्द्रिय-बल स्थापित करें। सूर्य देव मुझमें मेधा, प्रजा और प्रकाश स्थापित करें।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

मेधा (बुद्धि), प्रज्ञा (विशिष्ट ज्ञान), तेज और शारीरिक शक्ति का समग्र विकास

विस्तृत लाभ

मेधा (बुद्धि), प्रज्ञा (विशिष्ट ज्ञान), तेज और शारीरिक शक्ति का समग्र विकास।

जप काल

प्रातःकालीन सन्ध्या-वंदन या अध्ययन के समय।

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