शिवतर स्तुति (अष्टम अनुवाक)
नमः शम्भवाय च मयोभवाय च नमः शङ्कराय च मयस्कराय च नमः शिवाय च शिवतराय च।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
सुख के उद्गम (शंभु) और आनंद के उद्गम (मयोभव) को नमन है। सुख करने वाले (शंकर) और आनंद करने वाले (मयस्कर) को नमन है। जो मंगलमय (शिव) हैं और अत्यंत मंगलमय (शिवतर) हैं, उन्हें नमन है 31।
इस मंत्र से क्या होगा?
परमानंद की प्राप्ति, आध्यात्मिक और भौतिक सुखों की वर्षा
विस्तृत लाभ
परमानंद की प्राप्ति, आध्यात्मिक और भौतिक सुखों की वर्षा 31।
जप काल
रुद्राभिषेक के आठवें अनुवाक में।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ कृपाधारायै नमः
ॐ जैत्राय नमः
ॐ कुहूभर्त्रे नमः
एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता। लम्बोष्ठी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्तशरीरिणी॥ वामपादोल्लसल्लोहलताकण्टकभूषणा। वर्धनमूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयङ्करी॥
ॐ विजयाय नमः
ॐ नमो हनुमते महारुद्र अवताराय भूत प्रेत डाकिनी शाकिनी किल किल मारी मारी भैरव किल मसान किल मली किल चुड़ैल किल दैत्य किल ब्रह्म राक्षस किल... चल रे चल महा हनुमंते।