शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
तस्करपति स्तुति (तृतीय अनुवाक)
नमो वञ्चते परिवञ्चते स्तायूनां पतये नमः।
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारवैदिक स्तुति (अद्वैत भाव)
स्वरूपसर्वव्यापक शिव
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
धोखा देने वालों, ठगों और गुप्त चोरों के स्वामी के रूप में विद्यमान भगवान रुद्र को नमस्कार है (ईश्वर की सर्वव्यापकता का दर्शन) 14।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
चोरी और धोखे से रक्षा, तथा यह बोध कि अच्छे-बुरे सभी में शिव व्याप्त हैं
विस्तृत लाभ
चोरी और धोखे से रक्षा, तथा यह बोध कि अच्छे-बुरे सभी में शिव व्याप्त हैं 14।
जप काल
भय के समय मानसिक जप।
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ शरोद्भूताय नमः
ॐ पञ्चवक्त्राय नमः
ॐ कपित्थप्रियाय नमः
कमले कमलाक्षवल्लभे त्वं करुणापूरतरङ्गितैरपाङ्गैः। अवलोकय मामकिञ्चनानां प्रथमं पात्रमकृत्रिमं दयायाः॥
सिंहासनगता नित्यं पद्माञ्चितकरद्वया। शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी॥
शुद्धं बुद्धं महाप्रज्ञापण्डितं रणपण्डितं। रामं श्रीदत्तकरुणाभाजनं विप्ररंजनम्॥