शिव मंत्र
ॐ पूर्वां दिशं कृष्णरता पातु।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
कृष्ण में रत रहने वाली देवी पूर्व दिशा में मेरी रक्षा करें।
इस मंत्र से क्या होगा?
अंग: पूर्व दिशा की रक्षा
विस्तृत लाभ
अंग: पूर्व दिशा की रक्षा।
टिप्पणी
इस कवच के मंत्रों को न्यास (शरीर के अंगों को स्पर्श करते हुए) के रूप में जपा जाता है।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ दुर्ज्ञेयाय नमः
ॐ प्राज्ञाय नमः
देवीं सरस्वतीं सरस्वतीं देवीं देवीं सरस्वतीं वाजेभिर्वाजेभिस्सरस्वतीं देवीं देवीं सरस्वतीं वाजेभिः॥ सरस्वतीं वाजेभिर्वाजेभिस्सरस्वतीं सरस्वतीं वाजेभिर्वाजिनीवतीं वाजिनीवतीं वाजेभिस्सरस्वतीं सरस्वतीं वाजेभिर्वाजिनीवतीं॥ वाजेभिर्वाजिनीवतीं वाजिनीवतीं वाजेभिर्वाजेभिर्वाजिनीवतीं। वाजिनीवतीति वाजिनी-वती॥
हरिद्रां चतुर्बाहुं हरिद्रावदनं प्रभुम् । पाशाङ्कुशधरं देवं मोदकं दन्तमेव च ॥ भक्ताभयप्रदातारं वन्दे विघ्नविनाशनम् ॥
ॐ कृष्णायै नमः
ॐ अग्राह्याय नमः