शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
शिव मंत्र
ॐ राजेन्द्राय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारनाम-मंत्र
स्वरूपराजाओं के ईश्वर
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जो बड़े-बड़े आतातायी राजाओं को भी दंडित करने में सक्षम हैं।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
राज्य/पद प्राप्ति
विस्तृत लाभ
राज्य/पद प्राप्ति
जप काल
नित्य
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
अहं राष्ट्री सङ्गमनी वसूनां चिकितुषी प्रथमा यज्ञियानाम्। तां मा देवा व्यदधुः पुरुत्रा भूरिस्थात्रां भूर्यावेशयन्तीम्॥
ॐ श्रीकृष्णमहिष्यै नमः
ॐ वृषभासुरविध्वंसिने नमः
ॐ कराल-वदनां घोरां मुक्त-केशीं चतुर्भुजाम्। कालिकां दक्षिणां दिव्यां मुण्ड-माला विभूषिताम्। सद्यः-छिन्न-शिरः-खड्ग-वामाधोर्ध्व-कराम्बुजाम्। अभयं वरदञ्चैव दक्षिणोर्ध्वाधः-पाणिकाम्॥
ॐ वैकुण्ठनगरवासिन्यै नमः
कनकमहामणिभूषितलिङ्गं फणिपतिवेष्टितशोभितलिङ्गम्। दक्षसुयज्ञविनाशनलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम्॥