शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
शिव मंत्र
ॐ सर्वदेवादये नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारनाम-मंत्र
स्वरूपदेव-अग्रणी
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जो सभी देवताओं के आदि (मूल कारण) हैं।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
देव-कृपा
विस्तृत लाभ
देव-कृपा
जप काल
पूजा
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
वृत्तोत्फुल्लविशालाक्षं विपक्षक्षयदीक्षितम्। निनादत्रस्तविश्वाण्डं विष्णुमुग्रं नमाम्यहम्॥
ॐ अपारगुणसागरायै नमः
या श्रीः स्वयं सुकृतिनां भवनेष्वलक्ष्मीः पापात्मनां कृतधियां हृदयेषु बुद्धिः। श्रद्धा सतां कुलजनप्रभवस्य लज्जा तां त्वां नताः स्म परिपालय देवि विश्वम्॥ 18
ॐ जनार्दनाय नमः
ह्रीं भैरव भयंकरहर मां रक्ष-रक्ष हुं फट् स्वाहा।
आ नो दिवो बृहतः पर्वतादा सरस्वती यजता गन्तु यज्ञम्। हवं देवी जुजुषाणा घृताची शग्मां नो वाचमुशती शृणोतु॥