शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
शिव मंत्र
ॐ शिखण्डिकृतकेतनाय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपशिखंडी-ध्वज
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
मयूर (शिखंडी) को अपनी ध्वजा (केतन) बनाने वाले को नमन।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
कीर्ति-पताका (यश) का सर्वत्र फहराना
विस्तृत लाभ
कीर्ति-पताका (यश) का सर्वत्र फहराना।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ सुरारिभिदे नमः
इडा देवहूर्मनुर्यज्ञनीर्बृहस्पतिरुक्थामदानि शंसिषद् विश्वेदेवाः सूक्तवाचः पृथिविमातर्मा मा हिंसीर्मधु मनिष्ये मधु जनिष्ये मधु वक्ष्यामि मधु वदिष्यामि मधुमतीं देवेभ्यो वाचमुद्यासँशुश्रूषेण्यां मनुष्येभ्यस्तं मा देवा अवन्तु शोभायै पितरोऽनुमदन्तु॥
ॐ जनेश्वराय नमः
पवन तनय बल पवन समाना। (यह हनुमान जी की शक्ति का आह्वान कर न्याय प्राप्त करने हेतु है)।
ॐ पितृवाहनाय नमः
ॐ सर्वस्मै नमः