यक्ष्मा (रोग) नाशक मंत्र
शिवेन वचसा त्वा गिरिशाच्छा वदामसि। यथा नः सर्वमिज्जगदयक्ष्मं सुमना असत्॥
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
हे कैलाशवासी शिव! हम मंगलकारी वचनों से आपकी स्तुति करते हैं, जिससे हमारा यह संपूर्ण जगत् रोगरहित और प्रसन्नचित्त हो जाए 31।
इस मंत्र से क्या होगा?
संपूर्ण विश्व की शांति, और शरीर के समस्त रोगों (यक्ष्मा/तपेदिक आदि) का निवारण
विस्तृत लाभ
संपूर्ण विश्व की शांति, और शरीर के समस्त रोगों (यक्ष्मा/तपेदिक आदि) का निवारण 31।
जप काल
भस्म या जल अभिमंत्रित करते समय।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ वैष्णव्यै नमः
भव भेषज रघुनाथ जसु सुनहिं जे नर अरु नारि। तिन्ह कर सकल मनोरथ सिद्ध करहिं त्रिसिरारि॥
ॐ पुण्डरीकाय नमः
ॐ हस्तिपिशाचिलिखे स्वाहा ॥
ॐ पुरुषोत्तमाय नमः
ख्फ्रेँ ख्फ्रीँ चण्डे चण्डचामुण्डे ह्रीँ हूँ स्त्रीँ छ्रीँ विच्चे घोरे महामदोन्मनि क्लीँ ब्लूँ गुह्येश्वरि ॐ परानिर्वाणे ब्रह्मरूपिणि ॐ फ्रेँ फ्रेँ सिद्धिकरालि आप्यायिनि नवपञ्चचक्रनिलये घोराट्टराविणि कलासहस्रनिवासिनि खँ खँ खँ ह्सौँ फ्रेँ अवर्णेश्वरि प्रकृत्यपर शिवनिर्वाणदे ख्फ्रेँ स्वाहा॥