परशुराम अष्टकम् (श्लोक 6)
शुद्धं बुद्धं महाप्रज्ञापण्डितं रणपण्डितं। रामं श्रीदत्तकरुणाभाजनं विप्ररंजनम्॥
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
जो सर्वथा शुद्ध, प्रबुद्ध, महान प्रज्ञावान পণ্ডিত और युद्ध-विद्या (रण) में भी अत्यंत निपुण हैं। जो भगवान दत्तात्रेय की करुणा के पात्र हैं और विद्वानों/ब्राह्मणों (विप्रों) को आनंदित करने वाले हैं।
इस मंत्र से क्या होगा?
शुद्ध निर्मल बुद्धि, विद्या-प्राप्ति और युद्ध या बौद्धिक प्रतिस्पर्धा में विजय
विस्तृत लाभ
शुद्ध निर्मल बुद्धि, विद्या-प्राप्ति और युद्ध या बौद्धिक प्रतिस्पर्धा में विजय।
जप काल
विद्याध्ययन एवं परीक्षा में सफलता हेतु।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ परस्मै नमः
ॐ नमस्ते गणपतये ॥ त्वमेव प्रत्यक्षं तत्त्वमसि ॥ त्वमेव केवलं कर्ताऽसि ॥ त्वमेव केवलं धर्ताऽसि ॥ त्वमेव केवलं हर्ताऽसि ॥ त्वमेव सर्वं खल्विदं ब्रह्मासि ॥ त्वं साक्षादात्माऽसि नित्यम् ॥
ॐ दुर्गमच्छेदिन्यै नमः
ॐ पुण्डरीकाक्षाय नमः
ॐ विश्वमात्रे नमः
प्रतीच्यां उन्मत्त भैरवाय नमः प्रतीच्यां मां रक्ष रक्ष काल कंटकान् भक्ष भक्ष आवाहयाम्यहं इत्र तिष्ठ तिष्ठ हुं फट् स्वाहा।