शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
उच्छिष्ट गणपति (भैरव) न्यास मंत्र
ॐ उच्छिष्टगणपति देवतायै नमो हृदि।
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारउच्छिष्ट तांत्रिक मंत्र / न्यास मंत्र
स्वरूपउच्छिष्ट भैरव/गणपति
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
मैं हृदय में उच्छिष्ट गणपति (भैरव स्वरूप) को नमन करता हूँ।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
वामाचार तंत्र में ज्ञान व असीम सिद्धि प्राप्ति हेतु शरीर का शुद्धिकरण
विस्तृत लाभ
वामाचार तंत्र में ज्ञान व असीम सिद्धि प्राप्ति हेतु शरीर का शुद्धिकरण 24।
जप काल
साधना से पूर्व हृदय को स्पर्श करते हुए 24।
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दोर्भिर्युक्ता चतुर्भिः स्फटिकमणिनिभैरक्षमालान्दधाना। हस्तेनैकेन पद्मं सितमपि च शुकं पुस्तकं चापरेण॥ भासा कुन्देन्दुशङ्खस्फटिकमणिनिभा भासमानाऽसमाना। सा मे वाग्देवतेयं निवसतु वदने सर्वदा सुप्रसन्ना॥