शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
कैवल्य उमा-सहाय मंत्र
उमासहायं परमेश्वरं प्रभुं त्रिलोचनं नीलकण्ठं प्रशान्तम्। ध्यात्वा मुनिर्गच्छति भूतयोनिं समस्तसाक्षिं तमसः परस्तात्॥
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारध्यान एवं मोक्ष मंत्र
स्वरूपनीलकंठ, उमा-सहाय (सपरिवार शिव)
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
उमा के साथ विराजमान, परमेश्वर, त्रिनेत्र, नीलकंठ और अत्यंत शांत स्वरूप शिव का ध्यान करके मुनिगण अज्ञान के अंधकार से परे उस समस्त सृष्टि के साक्षिरूप भगवान को प्राप्त करते हैं 5।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
अज्ञान के अंधकार (तमस) से पार जाना और परम सत्य (कैवल्य) की प्राप्ति
विस्तृत लाभ
अज्ञान के अंधकार (तमस) से पार जाना और परम सत्य (कैवल्य) की प्राप्ति 5।
जप काल
ध्यान-मुद्रा में।
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