ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
शास्त्रीय पौराणिक मंत्र

वामदेव मंत्र (उत्तर मुख)

वामदेवाय नमो ज्येष्ठाय नमः श्रेष्ठाय नमो रुद्राय नमः कालाय नमः कलविकरणाय नमो बलविकरणाय नमो बलाय नमो बलप्रमथनाय नमः सर्वभूतदमनाय नमो मनोन्मनाय नमः॥

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

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प्रकारपंचब्रह्म उपासना मंत्र
स्वरूपवामदेव (संरक्षक स्वरूप, जल तत्त्व)
अर्थ एवं भावार्थ

इस मंत्र का अर्थ

वामदेव को नमन, जो सबसे बड़े (ज्येष्ठ) और श्रेष्ठ हैं। रुद्र को नमन, काल और शक्तियों के नियंत्रक को नमन। समस्त भूतों का दमन करने वाले और मन को उन्मन (उच्च अवस्था) में ले जाने वाले देव को नमन।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

अहंकार का शमन, मानसिक विकारों से मुक्ति, और आंतरिक शुद्धि

विस्तृत लाभ

अहंकार का शमन, मानसिक विकारों से मुक्ति, और आंतरिक शुद्धि 21।

जप काल

उत्तर दिशा की ओर मुख करके।

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