वामदेव मंत्र (उत्तर मुख)
वामदेवाय नमो ज्येष्ठाय नमः श्रेष्ठाय नमो रुद्राय नमः कालाय नमः कलविकरणाय नमो बलविकरणाय नमो बलाय नमो बलप्रमथनाय नमः सर्वभूतदमनाय नमो मनोन्मनाय नमः॥
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
वामदेव को नमन, जो सबसे बड़े (ज्येष्ठ) और श्रेष्ठ हैं। रुद्र को नमन, काल और शक्तियों के नियंत्रक को नमन। समस्त भूतों का दमन करने वाले और मन को उन्मन (उच्च अवस्था) में ले जाने वाले देव को नमन।
इस मंत्र से क्या होगा?
अहंकार का शमन, मानसिक विकारों से मुक्ति, और आंतरिक शुद्धि
विस्तृत लाभ
अहंकार का शमन, मानसिक विकारों से मुक्ति, और आंतरिक शुद्धि 21।
जप काल
उत्तर दिशा की ओर मुख करके।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ श्रीं ह्रीं भगवत्यै स्वाहा नेत्रयुग्मं सदाऽवतु। (स्वरूप: भगवती | लाभ: नेत्रों और सूक्ष्म दृष्टि की रक्षा | अर्थ: श्रीं ह्रीं स्वरूपा भगवती मेरे दोनों नेत्रों की रक्षा करें) 8
ॐ ओष्ठं पातु कृपादेवी।
ॐ पञ्चकूटायै नमः
ॐ दुर्गमालोकायै नमः
ॐ पिङ्गरोम्णे नमः
पाशाङ्कुश स्वदन्त आम्र फलवान् आखुवाहनः । विघ्नान् निहन्तु रक्तवर्णो विनायकः ॥