शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
शिव मंत्र
ॐ योगिने नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपमहान योगी
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
महान ध्यानी, हठ-योगी और योग के प्रणेता भगवान को नमन।
जप काल
नित्य प्रातः काल, लाल आसन पर बैठकर रुद्राक्ष या लाल चंदन की माला से 108 नामों का क्रमशः उच्चारण करते हुए पुष्प अर्पित करें।
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ॐ देवी चन्द्रघण्टायै नमः॥ 16
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ॐ वरारोहायै नमः
हस्तीन्द्राननमिन्दुचूडमरुणच्छायं त्रिनेत्रं रसात् आलिष्टं प्रियया सपद्मकरया स्वाङ्कस्थया सन्ततम् । बीजपूर गदेक्षु कार्मुकलसच्चक्राब्ज पाशोत्पल व्रीह्यग्रस्वविषाण रत्नकलशान् हस्तैर्वहन्तं भजे ॥
मृणालवालवल्लरी तरङ्गरङ्गदोर्लते लताग्रलास्यलोलनीललोचनावलोकने। ललल्लुलन्मलन्मनोज्ञमुग्धमोहनाश्रिते कदा करिष्यसीह मां कृपाकटाक्षभाजनम्॥
ॐ अनेकपार्श्वाय नमः।