शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
विष्णु मंत्र
ॐ अनन्तमूर्तये नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
जप काउंटर लोड हो रहा है...
स्वरूपअनंत स्वरूप
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
अनंत स्वरूप धारण करने वाले देव को नमन।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
दृष्टि का विस्तार और सर्वत्र ईश्वर दर्शन
विस्तृत लाभ
दृष्टि का विस्तार और सर्वत्र ईश्वर दर्शन।
इसे भी पढ़ें
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
नमो भगवते उग्र भैरवाय सर्वविघ्ननाशाय ठः ठः स्वाहा।
पाशाङ्कुशौ दन्त जम्बू दधानः स्फटिकप्रभः । रक्तांशुकः गणपतिः मुदे स्याद् ऋणमोचकः ॥
ॐ महाभुजाय नमः
प्रनवउँ पवनकुमार खल बन पावक ग्यान घन। जासु हृदय आगार बसहिं राम सर चाप धर॥
ॐ वज्रनखाय विद्महे तीक्ष्णदंष्ट्राय धीमहि। तन्नो नारसिंहः प्रचोदयात्॥
सुरासम्पूर्णकलशं रुधिराप्लुतमेव च। दधाना हस्तपद्माभ्यां कूष्माण्डा शुभदास्तु मे॥