शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
विष्णु मंत्र
अत्रोपविश्य लक्ष्मि! त्वं स्थिरा भव हिरण्मयि! सुस्थिरा भव सुप्रीत्या प्रसन्नवरदा भव॥
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारलक्ष्मी स्थिरीकरण मंत्र (श्लोक 11)
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
हे स्वर्णमयी लक्ष्मी! आप यहाँ (मेरे घर में) बैठें, स्थिर हों, प्रेमपूर्वक सुस्थिर हों और प्रसन्न होकर वरदान दें 14।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
चंचल लक्ष्मी का घर में दृढ़ता से टिकना
विस्तृत लाभ
चंचल लक्ष्मी का घर में दृढ़ता से टिकना 47।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
बालग्रहाभिभूतानां बालानां शान्तिकारकम्। सङ्घातभेदे च नृणां मैत्रीकरणमुत्तमम्॥ 17
ॐ भार्गव नरसिंहाय नमः
दुर्गेष्वटव्याजिमुखादिषु प्रभुः पायान्नृसिंहोऽसुरयूथपारिः
जयत्यतिबलो रामो लक्ष्मणश्च महाबलः। राजा जयति सुग्रीवो राघवेणाभिपालितः॥ दासोऽहं कोसलेन्द्रस्य रामस्याक्लिष्टकर्मणः। हनुमान् शत्रुसैन्यानां निहन्ता मारुतात्मजः॥
ॐ यमलार्जुनभञ्जनाय नमः
श्री राम जय राम जय जय राम