विष्णु मंत्र
अत्रोपविश्य लक्ष्मि! त्वं स्थिरा भव हिरण्मयि! सुस्थिरा भव सुप्रीत्या प्रसन्नवरदा भव॥
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
हे स्वर्णमयी लक्ष्मी! आप यहाँ (मेरे घर में) बैठें, स्थिर हों, प्रेमपूर्वक सुस्थिर हों और प्रसन्न होकर वरदान दें 14।
इस मंत्र से क्या होगा?
चंचल लक्ष्मी का घर में दृढ़ता से टिकना
विस्तृत लाभ
चंचल लक्ष्मी का घर में दृढ़ता से टिकना 47।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ दारिद्र्य विद्वेषणाय नमः।
ॐ नागेन्द्राय नमः
अश्मा च मे मृत्तिका च मे गिरयश्च मे पर्वताश्च मे...
ॐ सरस्वत्यै स्वाहेति श्रोत्रं पातु निरन्तरम्। (स्वरूप: सरस्वती | लाभ: कानों, श्रवण-शक्ति व नाद-ग्रहण की रक्षा | अर्थ: सरस्वती मेरे कानों की निरंतर रक्षा करें) 8
देवि प्रसीद परिपालय नोऽरिभीतेर्नित्यं यथासुरवधादधुनैव सद्यः। पापानि सर्वजगतां प्रशमं नयाशु उत्पातपाकजनितांश्च महोपसर्गान्॥ 18
ॐ परब्रह्मणे नमः