शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
विष्णु मंत्र
ॐ चन्द्रावली पातु गण्डं।
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
जप काउंटर लोड हो रहा है...
प्रकाररक्षा कवच मंत्र;
स्वरूपचन्द्रावली
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
चन्द्रावली मेरे गालों की रक्षा करें।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
अंग: गण्ड (गालों) की रक्षा
विस्तृत लाभ
अंग: गण्ड (गालों) की रक्षा।
टिप्पणी
इस कवच के मंत्रों को न्यास (शरीर के अंगों को स्पर्श करते हुए) के रूप में जपा जाता है।
इसे भी पढ़ें
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ शरणागतवत्सलाय नमः
नासै रोग हरै सब पीरा। जपत निरंतर हनुमत बीरा॥
ॐ सर्वराजगृहेस्थितायै नमः
ह्रीं विद्याधिष्ठातृदेव्यै स्वाहा ओष्ठं सदाऽवतु। (स्वरूप: विद्याधिष्ठात्री | लाभ: होठों और उच्चारण स्थान की रक्षा | अर्थ: विद्या की अधिष्ठात्री देवी मेरे होंठों की सदा रक्षा करें) 8
ॐ कदलीहोमसन्तुष्टायै नमः
ॐ भूतभृते नमः