शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
कालभैरवाष्टकम् - मंत्र 1
देवराजसेव्यमानपावनाङ्घ्रिपङ्कजं व्यालयज्ञसूत्रमिन्दुशेखरं कृपाकरम्।
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारस्तोत्र-मंत्र
स्वरूपकाल भैरव
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
इंद्र द्वारा सेवित, सर्प का जनेऊ धारण करने वाले कृपालु भैरव का मैं भजन करता हूँ।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
देवराज इंद्र के समान वैभव की प्राप्ति
विस्तृत लाभ
देवराज इंद्र के समान वैभव की प्राप्ति।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
कवचस्यास्य जापी तु ब्रह्मज्ञानं च विन्दति। इत्येतदुक्तं कवचं मया हैहयविद्विषः॥
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं भगवति भवानि देवि स्वाहा॥
भव भेषज रघुनाथ जसु सुनहिं जे नर अरु नारि। तिन्ह कर सकल मनोरथ सिद्ध करहिं त्रिसिरारि॥
ॐ पुण्डरीकाय नमः
प्रनवउँ पवनकुमार खल बन पावक ग्यान घन। जासु हृदय आगार बसहिं राम सर चाप धर॥
ॐ पञ्चाननाय नमः