शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
विष्णु मंत्र
ॐ दृप्तवक्त्राय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपउग्र मुख
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जिनका मुख अत्यंत तेज और ईश्वरीय गर्व से उद्भासित है, उन्हें नमस्कार है।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
चेहरे पर ओज (Aura) की वृद्धि
02
जिससे समाज में सम्मान और दबदबा स्थापित हो
विस्तृत लाभ
चेहरे पर ओज (Aura) की वृद्धि; जिससे समाज में सम्मान और दबदबा स्थापित हो।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ ह्रां ह्रीं ॐ नमो भगवते महा-वीर-वीराय सर्वदुःख निवारणाय ग्रहमण्डल सर्वभूतमण्डल सर्व-पिशाच-मण्डलोच्चाटन भूत-ज्वर एकाहिक-ज्वर द्वयाहिक-ज्वर त्र्याहिक-ज्वर चातुर्थिक-ज्वर संताप-ज्वर विषम-ज्वर ताप-ज्वर माहेश्वर-वैष्णव-ज्वरान् छिन्दि-छिन्दि यक्ष ब्रह्मराक्षस भूत-प्रेत-पिशाचान् उच्चाटय-उच्चाटय स्वाहा।
ॐ रुद्ररूपाय नमः।
ॐ कुमारीभोजनानन्दायै नमः
ॐ वेदान्तसारसन्दोहाय नमः
ॐ शिवायै नमः
ॐ परब्रह्मणे नमः