शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
विष्णु मंत्र
ॐ दुर्गमाङ्ग्यै नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारनामावली मंत्र | जप समय: प्रातः या घोर संकट काल |
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जिनके श्री-अंगों का पार पाना अत्यंत कठिन है।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ भूधरात्मजाय नमः।
ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः॥
या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता। या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना॥ या ब्रह्माच्युतशंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा पूजिता। सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा॥
गोपनीयमिदं देवि ममात्मासि मणिर्यथा। धन्यं यशस्यमायुष्यं श्रीकरं पुष्टिवर्धनम्॥
नारिकेलानम्र कदली गुड पायस धारिणम् । शरच्चन्द्र वपुषं भजे भक्त गणपतिम् ॥
ॐ गोवर्धनवरप्रदाय नमः