शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
विष्णु मंत्र
ॐ द्वैमातुराय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारनामावली मंत्र
स्वरूपद्वैमातुर
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
मातृ-पक्ष से सुख और वात्सल्य की प्राप्ति
विस्तृत लाभ
मातृ-पक्ष से सुख और वात्सल्य की प्राप्ति
जप काल
नाम जप।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
रक्षांसि यत्रोग्रविषाश्च नागा यत्रारयो दस्युबलानि यत्र। दावानलो यत्र तथाब्धिमध्ये तत्र स्थिता त्वं परिपासि विश्वम्॥
स्फुरन्मौलि कल्लोलिनी चारु गङ्गा। लसद्भालबालेन्दु कण्ठे भुजङ्गा॥
ॐ कृपाधारायै नमः
ॐ अज्ञाननाशिन्यभीष्टदायै नमः
इतीदमद्भुतस्तवं निशम्य भानुनन्दिनी करोतु सन्ततं जनं कृपाकटाक्षभाजनम्। भवेत्तदैव सञ्चितत्रिरूपकर्मनाशनं लभेत्तदा व्रजेन्द्रसूनुमण्डलप्रवेशनम्॥
ॐ कपिलायै नमः