शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
विष्णु मंत्र
ॐ द्विरूपभृते नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
जप काउंटर लोड हो रहा है...
स्वरूपनर-सिंह रूप
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जो एक साथ नर (मनुष्य) और सिंह का दोहरा रूप धारण करते हैं, उन्हें नमस्कार है।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
द्वैत (संसार) और अद्वैत (ब्रह्म) के रहस्यमय दर्शन और ज्ञान की समझ
विस्तृत लाभ
द्वैत (संसार) और अद्वैत (ब्रह्म) के रहस्यमय दर्शन और ज्ञान की समझ।
इसे भी पढ़ें
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ वीरघ्नाय नमः
ॐ कराल-वदनां घोरां मुक्त-केशीं चतुर्भुजाम्। कालिकां दक्षिणां दिव्यां मुण्ड-माला विभूषिताम्। सद्यः-छिन्न-शिरः-खड्ग-वामाधोर्ध्व-कराम्बुजाम्। अभयं वरदञ्चैव दक्षिणोर्ध्वाधः-पाणिकाम्॥
ॐ नमो बजर का कोठा, जिस पर पिंड हमारा पेठा। ईश्वर कुंजी ब्रह्मा का ताला, मेरे आठों धाम का यती हनुमंत रखवाला।
ॐ कवचिने नमः
ॐ रुक्मिण्यै नमः
ॐ उत्तालतालभेत्त्रे नमः