शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
विष्णु मंत्र
ॐ द्विरूपभृते नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपनर-सिंह रूप
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जो एक साथ नर (मनुष्य) और सिंह का दोहरा रूप धारण करते हैं, उन्हें नमस्कार है।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
द्वैत (संसार) और अद्वैत (ब्रह्म) के रहस्यमय दर्शन और ज्ञान की समझ
विस्तृत लाभ
द्वैत (संसार) और अद्वैत (ब्रह्म) के रहस्यमय दर्शन और ज्ञान की समझ।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ कष्टहर्त्र्यै नमः
ॐ वज्रहस्ताय नमः
ॐ पुराणपुरुषोत्तमाय नमः
धर्मसेतुपालकं त्वधर्ममार्गनाशकं कर्मपाशमोचकं सुशर्मदायकं विभुम्।
स्वस्ति श्रीगणनायको गजमुखो मोरेश्वरः सिद्धिदः बल्लाळस्तु विनायकस्तथा मढे चिन्तामणिस्थेवर । लेण्याद्रौ गिरिजात्मजः सुवरदो विघ्नेश्वरश्चोझरे ग्रामे रांजणसंस्थितो गणपतिः कुर्यात् सदा मङ्गलम् ॥
ॐ ऐं ह्रीं श्रीं ज्येष्ठ लक्ष्मी स्वयम्भुवे ह्रीं ज्येष्ठायै नमः।