काल भैरव त्र्यक्षरी बीज मंत्र
ॐ ह्रां ह्रीं ह्रूं काल भैरवाय नमः।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
ॐ, ह्रां, ह्रीं, ह्रूं (परम चेतना और शिव के बीज)। मैं समय के अधिपति काल भैरव को नमन करता हूँ।
इस मंत्र से क्या होगा?
नकारात्मक ऊर्जा, काले जादू और अज्ञात भय का पूर्ण नाश
दिव्य शक्ति का संचार
विस्तृत लाभ
नकारात्मक ऊर्जा, काले जादू और अज्ञात भय का पूर्ण नाश। दिव्य शक्ति का संचार 17।
जप काल
कालाष्टमी या रविवार के दिन, सरसों के तेल का दीपक जलाकर रुद्राक्ष की माला से 108 बार जप 17।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ सनातनाय नमः
ॐ रामभक्ताय नमः
ॐ वत्सलाय नमः
ॐ कराल-वदनां घोरां मुक्त-केशीं चतुर्भुजाम्। कालिकां दक्षिणां दिव्यां मुण्ड-माला विभूषिताम्। सद्यः-छिन्न-शिरः-खड्ग-वामाधोर्ध्व-कराम्बुजाम्। अभयं वरदञ्चैव दक्षिणोर्ध्वाधः-पाणिकाम्॥
राजमातां राजलक्ष्मीं राजेष्टफलदायिनीम्। प्रत्यङ्गिरां नमस्यामि सिद्धिलक्ष्मीजयप्रदां॥
मयि मेधां मयि प्रजां मय्यग्निस्तेजो दधातु। मयि मेधां मयि प्रजां मयीन्द्र इन्द्रियं दधातु। मयि मेधां मयि प्रजां मयि सूर्यो भ्राजो दधातु॥