शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
अकाल मृत्यु निवारण मंत्र
ॐ ह्रीं बटुकाय मम अकाल मृत्यु निवारय निवारय बटुकाय ह्रीं ॐ स्वाहा।
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारमहामृत्युंजय स्वरूप मंत्र
स्वरूपबटुक भैरव
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
हे बटुक, मेरी अकाल मृत्यु का निवारण करें।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
गंभीर रोगों और दुर्घटनाओं से रक्षा हेतु
विस्तृत लाभ
गंभीर रोगों और दुर्घटनाओं से रक्षा हेतु 11।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ मायाश्रयाय नमः
ॐ द्वैमातुराय नमः
ॐ श्रीं ह्रीं पातु मे ग्रीवां स्कन्धं मे श्रीं सदाऽवतु। (स्वरूप: श्रीं ह्रीं स्वरूपा | लाभ: गर्दन और कंधों की रक्षा | अर्थ: देवी मेरी ग्रीवा और स्कंध की रक्षा करें) 8
चन्द्रां प्रभासां यशसा ज्वलन्तीं श्रियं लोके देवजुष्टामुदाराम्। तां पद्मिनीमीं शरणमहं प्रपद्येऽलक्ष्मीर्मे नश्यतां त्वां वृणे॥
ॐ श्रीमते नमः
ॐ कुब्जाकृष्णाम्बरधराय नमः