शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
विष्णु मंत्र
ॐ जलक्रीडासमासक्तगोपीवस्त्रापहारकाय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारनाम-जप मन्त्र; ये मन्त्र वासुदेव, बाल-गोपाल, और द्वारकाधीश स्वरूपों का पूर्ण प्रतिनिधित्व करते हैं।
स्वरूपचीर-हारी
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जलक्रीड़ा में आसक्त गोपियों के वस्त्रों का हरण करने वाले को नमस्कार।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
भौतिक आवरण से मुक्ति
विस्तृत लाभ
भौतिक आवरण से मुक्ति
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ विष्णवे नमः।
ॐ विश्वतोवदनायै नमः
कांसोस्मितां हिरण्यप्राकारामार्द्रां ज्वलन्तीं तृप्तां तर्पयन्तीम्। पद्मे स्थितां पद्मवर्णां तामिहोपह्वये श्रियम्॥
न श्रुतं कवचं देव न चोक्तं भवता मम। इति पृष्टः स गिरिशो मन्त्रयन्त्राङ्गतत्त्ववित्॥
विद्यार्थी लभते विद्यां, धनार्थी लभते धनम् । पुत्रार्थी लभते पुत्रान्, मोक्षार्थी लभते गतिम् ॥
विष्णवे जिष्णवे महाविष्णवे प्रविष्णवे महेश्वराय