ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
शास्त्रीय पौराणिक मंत्र

विष्णु मंत्र

ॐ क्षेत्राय नमः

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

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स्वरूपक्षेत्र स्वरूप
अर्थ एवं भावार्थ

इस मंत्र का अर्थ

जो स्वयं कुरुक्षेत्र या धर्मक्षेत्र रूपी युद्धभूमि हैं, उन्हें नमस्कार है।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

जीवन के धर्मयुद्ध में साधक को सही मार्ग और उचित आधार प्रदान करना

विस्तृत लाभ

जीवन के धर्मयुद्ध में साधक को सही मार्ग और उचित आधार प्रदान करना।

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ॐ वरप्रदायै नमः

ॐ प्रतापवते नमः

ॐ ह्रः ॐ सौं ॐ वैं ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्रीजयजय चण्डिकायै नमः। ॐ स्वीं स्वीं विध्वंसय विध्वंसय ॐ प्लूं प्लूं प्लावय प्लावय... (अति विस्तृत तांत्रिक शृंखला)... ॐ चामुण्डायै विच्चे स्वाहा। मम सकल मनोरथं देहि देहि, सर्वोपद्रवं निवारय निवारय... भञ्जय भञ्जय ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं स्वाहा॥

ॐ यो वै रामचन्द्रः स भगवान् ये भूतभविष्यत् तस्मै वै नमो नमः भूर्भुवः स्वः

ॐ महर्षये नमः

ॐ हनुमान पहलवान पहलवान, बरस बारह का जबान, हाथ में लड्‍डू मुख में पान, खेल खेल गढ़ लंका के चौगान, अंजनी‍ का पूत, राम का दूत, छिन में कीलौ नौ खंड का भू‍त, जाग जाग हड़मान हुँकाला, ताती लोहा लंकाला, शीश जटा डग डेरू उमर गाजे, वज्र की कोठड़ी ब्रज का ताला, आगे अर्जुन पीछे भीम, चोर नार चंपे ने सींण, अजरा झरे भरया भरे, ई घट पिंड की रक्षा राजा रामचंद्र जी लक्ष्मण कुँवर हड़मान करें।