शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
विष्णु मंत्र
ॐ मङ्गलाय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारनाम-मंत्र
स्वरूपपरम मंगल
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जो साक्षात् मंगल रूप हैं और अमंगलों का नाश करते हैं।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
सर्व-कल्याण
विस्तृत लाभ
सर्व-कल्याण
जप काल
नित्य
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
पूरो मंत्र ईश्वरों वाचा ओम हनुमत वेदर वेग वेग आओ अमुक बंधी को बंधन से छुड़ाओ भेड़ी तोड़ो ताला तोड़ो बंधन धन तोड़ो मोडा अमुक बंधी को बंधन से छुड़ाओ मेरी भक्ति गुरु की शक्ति। पूरो मंत्र ईश्वरों वाचा।
ॐ वाग्देव्यै च विद्महे ब्रह्मपत्न्यै च धीमहि। तन्नो वाणी प्रचोदयात्॥
ॐ करञ्जारण्यवासिन्यै नमः
दिव्याद्वृन्दारण्यकल्पद्रुमाधः श्रीमद्रत्नागारसिंहासनस्थौ। श्रीश्रीराधाश्रीलगोविन्ददेवौ प्रेष्ठालीभिः सेव्यमानौ स्मरामि॥
ॐ अनन्तनित्यायै नमः
ॐ महाज्वालाय विद्महे वक्रतुण्डाय धीमहि । तन्नो दन्ती प्रचोदयात् ॥