ऊर्ध्व मुख (हयग्रीव) रक्षण मंत्र
ॐ नमो भगवते पंचवदनाय ऊर्ध्व मुखे। हयग्रीवाय सकल जन वशीकरणाय स्वाहा॥
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
आकाश की ओर देखने वाले हयग्रीव स्वरूप को नमस्कार है, जो सभी जनों को साधक के अनुकूल (वशीभूत) करते हैं।
इस मंत्र से क्या होगा?
उच्च ज्ञान की प्राप्ति, वाक्-सिद्धि, संपूर्ण जनों का सकारात्मक वशीकरण (Goodwill) और उत्तम संतति की प्राप्ति
विस्तृत लाभ
उच्च ज्ञान की प्राप्ति, वाक्-सिद्धि, संपूर्ण जनों का सकारात्मक वशीकरण (Goodwill) और उत्तम संतति की प्राप्ति 10।
जप काल
आकाश (ऊपर) की ओर ध्यान करते हुए।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ मेधा देवी जुषमाणा न आगाद्विश्वाची भद्रा सुमनस्यमाना। त्वया जुष्टा नुदमाना दुरुक्तान बृहद्वदेम विदथे सुवीराः॥
मया सो अन्नमत्ति यो विपश्यति यः प्राणिति य ईं शृणोत्युक्तम्। अमन्तवो मां त उप क्षियन्ति श्रुधि श्रुत श्रद्धिवं ते वदामि॥
ॐ धर्मनिलयायै नमः
राधे कृष्ण राधे कृष्ण कृष्ण कृष्ण राधे राधे । राधे श्याम राधे श्याम श्याम श्याम राधे राधे ॥
विष्णवे जिष्णवे महाविष्णवे प्रविष्णवे महेश्वराय
ॐ ब्रह्मण्यय नमः