शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
विष्णु मंत्र
नारायण एवेदं सर्वं यद्भूतं यच्च भव्यम्
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारउपनिषदिक ध्यान मंत्र
स्वरूपविराट नारायण
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जो कुछ भी अतीत में था, वर्तमान में है, और भविष्य में होगा, वह सब केवल नारायण ही हैं; उनके अतिरिक्त कुछ नहीं है।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
अद्वैत ज्ञान की प्राप्ति और मृत्यु-भय से मुक्ति
विस्तृत लाभ
अद्वैत ज्ञान की प्राप्ति और मृत्यु-भय से मुक्ति 2।
जप काल
वेदांत चिंतन या ब्रह्म मुहूर्त में ध्यान के समय।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ जामदग्न्यमहादर्पदलनाय नमः
पाँचों त्रिशेम चलें, लांगुरिया सलार चलें। भीम की गदा चले, हनुमान की हाँक चले। नाहर की धाक चलै, नहीं चलै, तो हजरत सुलेमान के तखत की दुहाई है। एक लाख अस्सी हजार पीर व पैगम्बरों की दुहाई है। चलो मन्त्र, ईश्वर वाचा। गुरु का शब्द साँचा।
ॐ नमोस्तुते नमः।
ॐ शशाङ्कशेखरसुताय नमः
ॐ लोकशोकविनाशिन्यै नमः
ॐ पार्वतीप्रियनन्दनाय नमः