शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
विष्णु मंत्र
ॐ रुक्मिण्यै नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारनाम-मंत्र;
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जो अद्वैत रूप से द्वारकाधीश की रानी रुक्मिणी भी हैं।
जप काल
तुलसी माला पर जप।
टिप्पणी
साधना की दृष्टि से इन नामों को ॐ और 'नमः' या 'स्वाहा' के सम्पुट के साथ जपा जाता है।
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
रक्तो रक्ताङ्गरागां शुक कुसुमायुत तुन्दिलश्चन्द्रमौलिः नेत्रैर्युक्तस्त्रिभिर्वामनकरचरणो बीजपूरं दधानः । हस्ताग्रक्लृप्त पाशाङ्कुश शरवरदो नागवक्त्रो हि भूषो देवः पद्मासनस्थो भवतु सुखकरो भूतये विघ्नराजः ॥
ॐ वागीश्वर्यै नमः
ॐ यो वै रामचन्द्रः स भगवान् ये सर्वभूतात्मा तस्मै वै नमो नमः भूर्भुवः स्वः
ॐ जगद्वसवे नमः
ॐ मध्यं पातु हिरण्याक्ष-वक्षःकुक्षिविदारणः
ॐ पिनाकिने नमः