शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
विष्णु मंत्र
ॐ शब्दमूलान्तरात्मकाय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपअंतर्यामी
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
सभी शब्दों (ध्वनियों) के मूल में विद्यमान अंतरात्मा को नमन।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
मौन की गहराई और आत्म-साक्षात्कार
विस्तृत लाभ
मौन की गहराई और आत्म-साक्षात्कार।
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ ऐं ह्रीं श्रीं संतान लक्ष्म्यै नमः।
ॐ पीतवस्त्राय नमः
ॐ धनवते नमः।
ॐ ह्रीं श्रीं त्र्यक्षरो मन्त्रो नैर्ऋत्यां मे सदाऽवतु। (अर्थ: त्र्यक्षरी मन्त्र नैऋत्य कोण में रक्षा करे) 8
जो महान तपस्वी महर्षि जमदग्नि के पुत्र हैं, उन्हें नमस्कार। (लाभ: पितृ-दोष शांति) 19।
तब जनक पाइ बसिष्ठ आयसु ब्याह साजि सँवारि कै। मांडवी श्रुतकीरति उरमिला कुँअरि लईं हँकारि कै॥